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दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 25.11.16

  • दलित किशोरी को अगवा कर दुष्कर्म का आरोप
  • आगजनी को अंजाम देने वालों को बचाने की साजिश
  • दरभंगा में दलितों पर दबंगों का कहर
  • वर्ण व्यवस्था पर कटाक्ष करता नाटक “‘उम्र पैंतालिस बतायी गई थी”

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दलित किशोरी को अगवा कर दुष्कर्म का आरोप

घर से खेत पर जाने के लिए निकली 15 वर्षीय दलित किशोरी को गांव का एक युवक अपने अज्ञात साथी की मदद से मुंह दबाकर अगवा कर अपने घर ले गया। आरोप है कि युवक ने किशोरी से रेप किया और रात भर कमरे में बंधक बनाकर रखा रहा।

 दलित किशोरी को अगवा कर दुष्कर्म का आरोपPC: पीलीभ्‍ाीत/उत्‍ततर प्रदेश्‍ा

घर से खेत पर जाने के लिए निकली 15 वर्षीय दलित किशोरी को गांव का एक युवक अपने अज्ञात साथी की मदद से मुंह दबाकर अगवा कर अपने घर ले गया। आरोप है कि युवक ने किशोरी से रेप किया और रात भर कमरे में बंधक बनाकर रखा रहा। दूसरे दिन सुबह तड़के शिकायत करने पर धमकी देकर छोड़ दिया। पिता के आने पर पीड़ित किशोरी ने घटना की तहरीर पुलिस को दी है। 

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बरखेड़ा क्षेत्र के एक गांव के निवासी दलित मजदूर ने बताया कि सोमवार को वह भतीजे की दवा लेने के लिए लखनऊ गया हुआ था। घर पर उसकी पत्नी व पंद्रह वर्षीय बेटी थी। रात करीब नौ बजे उसकी बेटी शौच के लिए खेत पर जाने को निकली। आरोप है कि गांव का एक युवक अपने एक अज्ञात साथी के साथ आ गया। जिसके बाद किशोरी के मकान के बाहर निकलते ही मुंह दबाकर अपने घर ले गया। जहां आरोप है कि गांव के युवक ने किशोरी रेप किया और दूसरा साथी धमकाने में लगा रहा। रात भर बंधक बनाकर रखने के बाद मंगलवार सुबह तड़के करीब पौने पांच बजे आरोपियों ने किशोरी को शिकायत करने पर मारने की धमकी देकर भगा दिया। सुबह पिता भी लखनऊ से लौट आए। जिसके  बाद किशोरी ने अपने साथ घटित वारदात की जानकारी दी। पिता के साथ थाने पहुंचकर किशोरी ने पुलिस को एक नामजद समेत दो के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। जिस पर पुलिस ने आरोपी के पिता को हिरासत में लेकर छानबीन शुरू कर दी। 

24 घंटे बाद भी नहीं कराया मेडिकल 

थानाध्यक्ष की गैर हाजिरी में बरखेड़ा पुलिस के कार्यवाहक इंचार्ज ने मामले की जांच के नाम पर आरोपी के पिता को हिरासत में लिया। घटना को संदिग्ध भी करार दे दिया, लेकिन सच सामने लाने के बजाए लापरवाही बरकरार रखी। न तो प्रकरण की रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके अलावा तहरीर मिलने के 24 घंटे बीतने के बाद भी किशोरी का मेडिकल कराने की जहमत नहीं उठाई है। सिर्फ संदिग्ध करार देकर घटना को टरकाने के प्रयास किए जा रहे है। 

सौजन्य: अमर उजाला-

ब्यूरो /पीलीभीत

Updated Thu, 24 Nov 2016 11:07 PM IST

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/pilibhit/crime/dalit-girl-kidnapped-rape-charges

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 आगजनी को अंजाम देने वालों को बचाने की साजिश

औरायबासा में हुए अग्निकांड को अंजाम देने वालों को बचाने की कोशिश में यह निजाम लग गया है. लेकिन सच्चाई को बदल नहीं सकता है.

 | Updated Date: Nov 25 2016 6:13AM

 मधेपुरा : उदाकिशुनगंज प्रखंड के औरायबासा में हुए अग्निकांड को अंजाम देने वालों को बचाने की कोशिश में यह निजाम लग गया है. लेकिन सच्चाई को बदल नहीं सकता है. अगर आततायियों को बचाने की कोशिश की गयी तो भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी इसका पुरजोर विरोध करेगी. गुरुवार को भाकपा के राज्य कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद प्रभाकर ने पूरे मामले की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट जारी करते हुए कहा.

जांच दल में उनके साथ शामिल जिला मंत्री विद्याधर मुखिया, अंचल मंत्री उमाकांत सिंह, वरीय नेता दिनेश्वर प्रसाद सिंह, द्गिम्बर झा, रमण कुमार पिन्टु, बैजनाथ सिंह, अनिल पासवान ने कहा कि औरायबासा में हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण है.  वर्षों से बसे दलितों एवं भूमिहीनों के घर को विगत 17 तरह नवंबर की रात भूमि के अवैध खरीदार एवं उनके पोषित लठैतों ने पहले तो फायरिंग की और फिर 18 दलित परिवार के झोपड़ियों को आग के हवाले करने की जघन्य घटना को अंजाम दिया. भाकपा नेता प्रभाकर ने कहा कि सुनियोजित रूप से इस घटना को अपराधियों ने अंजाम दियाऔर अब इस घटना को दूसरी मोड़ देने का प्रयास किया जा रहा है़ इसमें कुछ स्थानीय जन प्रतिनिधि, अवैध खरीदार उनके सगे संबंधी एवं कुछ पदाधिकारी का मिली भगत है़ उन्होंने कहा कि विगत 2002 ई़ में ही भाकपा द्वारा इस जमीन पर लाल झंडा गाड़कर सौ से अधिक घर बसाया गया था़  इसमें ज्यादा दलित एवं भूमिहीन है़ पहले तो भूस्वामी इन गरीबों का आर्थिक शोषण किया और फिर धोखा दिया़  जब भाकपा के नेतृत्व में जमीन पर कब्जा जमा किया गया. तब अवैध रूप से कुछ स्थानीय दबंगों ने कम राशि देकर जमीन खरीदना शुरू किया. जो हर हाल में इस जमीन पर अपना कब्जा जमाना चाहता है़ प्रभाकर ने कहा कि भाकपा अनवरत वर्षों से बसे इन दलितों एवं गरीबों को वासगीत पर्चा देने की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है़ l

सौजन्य: प्रभात खबर-

http://www.prabhatkhabar.com/news/madhepura/story/898329.html

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दरभंगा में दलितों पर दबंगों का कहर

एक दलित वृद्ध दंपत्ति ने जब इसका विरोध किया तो दबंगों ने दोनों पति-पत्नी को ना सिर्फ हाथ पांव बांध कर घर को पूरी तरह उजाड़ दिया। इतना ही नहीं उसके मुंह में मल – मूत्र भी जबरन डाल दिया गया। दबंगों का घंटों भर दलितों पर कहर चलता रहा।

November 24, 2016

दरभंगा: बिहार के दरभंगा जिले अंतर्गत कोर्थ गांव में दबंगों का दलित पर जबरदस्त कहर देखने को मिला। सरकार द्वारा दलित को दिए जमीन को जबरन गांव के ही कुछ दबंग अपने सगे संबंधी और अपने गुर्गे के साथ दलितों के घर पर हमला कर दिया। पहले तो उसकी जमकर पिटाई की सामन लूट लिए गए कुछ घरो को उजाड़ दिया तो कुछ घरों को आग के हवाले कर दिया गया।

एक दलित वृद्ध दंपत्ति ने जब इसका विरोध किया तो दबंगों ने दोनों पति-पत्नी को ना सिर्फ हाथ पांव बांध कर घर को पूरी तरह उजाड़ दिया। इतना ही नहीं उसके मुंह में मल – मूत्र भी जबरन डाल दिया गया। दबंगों का घंटों भर दलितों पर कहर चलता रहा। इसकी सूचना थाने को मलते ही भारी संख्या में पुलिस पहुंच गयी। हलांकि पुलिस के आते ही सभी हमलावर फरार हो गए। तकरीबन एक दर्जन लोग घायल हो गये। घायल में चार दलित की हालत गंभीर है जिसे दरभंगा अस्पताल में उचित इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। इलाके में तनाव जारी है। पुलिस घटना स्थल पर लगातार कैम्प कर रही है।

मामला घनश्यामपुर थाना क्षेत्र के कोर्थ गांव की है जहां सरकार के अधिकारी सीओ और थाना पुलिस गांव के ही कई दलित लोगों को भूदान के अंतर्गत मिले जमीन पर 19,11,2016 को अलग अलग जगहों पर भू दखल कराया, जिसके बाद दलित परिवार वहां अपनी झोपडी बना कर रहने लगे। दबंगों को यह बात नागवार गुजरी और दो दिन बाद ही दबंग ने कानून को ठेंगा दिखाते हुए दलितों के घरों पर एक साथ हमला कर ना सिर्फ लूट पाट मचाई बल्कि जमकर मारपीट की।

ज्यादातर घरों को आग के हवाले कर दिया। घटना के बाद घायलों को दरभंगा अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया। वहीं आरोपी पुलिस की दबिश के कारण गांव छोड़ फरार है। पुलिस ने तकरीबन 35 लोगो के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर घर पकड़ शुरु कर दी है। आनेवाले दिनों में दलितों के लिए और बुरे होने वाले है।

सौजन्य: मेग्निफिसेंट बिहार

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वर्ण व्यवस्था पर कटाक्ष करता नाटक “‘उम्र पैंतालिस बतायी गई थी”

नाटक ‘उम्र पैंतालिस बतायी गई थी का मंचन का वर्ण व्यवस्था पर कटाक्ष किया गया। सुब्रत राय के निर्देशन में हुए मंचन दिखाया गया कि गांव में बरगद के नीचे लगने वाली पाठशाला में विद्यार्थियों को उनकी कक्षा के अनुसार नहीं बल्कि जाति के हिसाब से बैठना होता है। जहां एक दिन पंडित जी विद्यार्थियों को संस्कृत के श्लोकों का पाठ करवा रहे होते हैं, लेकिन बाल्मीकि को इन श्लोकों का पाठ करने से मना कर देते हैं, बाल्मीकि इस बात का विरोध करते हैं तो पंडित जी इसे अपना अपमान समझ लेते हैं और कहते हैं कि यदि यह बाल्मीकि पाठशाला आएगा तो मैं पाठशाला नहीं आऊंगा।

राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में शुरू हुआ नाट्य समारोह

लखनऊ। महोत्सव के अन्तर्गत होने वाले नाट्य समारोह का आगाज गुरुवार को शहीदों को नमन के साथ हुआ। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में पहले दिन शहर के वरिष्ठ एवं युवा रंगकर्मियों के साथ ही तमाम संस्कृतिकर्मी एकत्रित हुए और उन्होंने देश पर प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों की याद में दिया जलाते हुए वीरों को श्रद्धांजलि दी। समारोह की आयोजक कलाकार एसोसिसएशन की ओर से राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह के परिसर को मोमबत्ती से रोशन किया गया था। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में जस्टिस एससी वर्मा मौजूद थे। साथ ही वरिष्ठ रंगकर्मी संगम बहुगुणा, विनोद मिश्रा, स्वतंत्र काले, हरीश बडोला, पुनीत अस्थाना, मुकेश वर्मा के साथ ही अन्य रंगकर्मी व संस्कृतिकर्मियों ने दीप जलाकर शहीदों को याद किया। इस मौके पर जादूगर राकेश ने तिरंगा झण्डा भी जादू से बनाया। नाट्य समारोह से पूर्व रंग जुलूस निकलने की परम्परा थी लेकिन इस वर्ष मेट्रो का काम होने के कारण रंग जुलूस नहीं निकालने का निर्णय लिया।

पहले दिन ‘उम्र पैंतालिस बतायी गई थी का हुआ मंचन

नाट्य समारोह के दौरान शहर की 20 रंग संस्थाएं नाट्य मंचन कर रही हैं। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में पहले दिन थिएट्रॉन संस्था की ओर से नाटक ‘उम्र पैंतालिस बतायी गई थी का मंचन का वर्ण व्यवस्था पर कटाक्ष किया गया। सुब्रत राय के निर्देशन में हुए मंचन दिखाया गया कि गांव में बरगद के नीचे लगने वाली पाठशाला में विद्यार्थियों को उनकी कक्षा के अनुसार नहीं बल्कि जाति के हिसाब से बैठना होता है। जहां एक दिन पंडित जी विद्यार्थियों को संस्कृत के श्लोकों का पाठ करवा रहे होते हैं, लेकिन बाल्मीकि को इन श्लोकों का पाठ करने से मना कर देते हैं, बाल्मीकि इस बात का विरोध करते हैं तो पंडित जी इसे अपना अपमान समझ लेते हैं और कहते हैं कि यदि यह बाल्मीकि पाठशाला आएगा तो मैं पाठशाला नहीं आऊंगा। ठाकुर की बेटी सुगंधा बाल्मीकि का साथ देती हैं और उससे कहती है कि जब तक पंडित जी नहीं आते हैं तो तुम बच्चों को पढ़ाओ। कुछ दिन बाद मास्टर जी और पंडित जी को न चाहते हुए भी दलित बच्चों के बोर्ड परीक्षा फार्म भरवाये जाते हैं। दलित बच्चे पास हो जाते हैं लेकिन जब अंकपत्र आता है तो उसमें सभी की मास्टर और पंडित ने साजिश करते हुए उम्र पैंतालिस लिख दी जिससे कोई नौकरी न पा सके। मंच पर शरद, अंकित, मयंक, उदय, प्रशांत, इकबाल, रिची, निवेदिता, स्मृति, मुकेश, अविनाश के साथ ही अन्य कलाकारों ने अभिनय किया।

सौजन्य: हिंदुस्तान लाइव-

http://www.livehindustan.com/news/lucknow/article1-theater-festival-started-with-the-tribute-to-solder-610571.html

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