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दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 23.11.16

  • स्कूल के बाथरूम में मिली दलित किशोरी की लाश.
  • भाइयों ने किया प्रेग्नेंट बहन का ऐसा हाल, पति, सास और ससुर को किया खत्म.
  • मैडम, आइटम गर्ल कह कर परेशान करती हैं.
  • एसटी एससी कानून में 4 सालों में सिर्फ 22 लोगों को मिली सजा, ज्यादातर छूटे.

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स्कूल के बाथरूम में मिली दलित किशोरी की लाश

यहां तीन दिन पहले गायब एक दलित नाबालिग की लाश गांव के ही प्राइमरी स्कूल के बाथरूम में मिली है। शव के कपड़े नहीं हैं। परिजनों को आशंका है कि किशोरी की रेप के बाद हत्या की गई है। शव की पहचान छिपाने के लिए उसके शरीर पर तेजाब डाला गया है।

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पुलिस का कहना है कि 16 साल की दलित किशोरी शनिवार की शाम अचानक लापता हो गई। परिजनों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन कोई पता नही चल सका। मंगलवार सुवह गांव के बच्चे प्राइमरी स्कूल पहुंचे तो उन्होंने तेजाब से झुलसा एक अर्धनग्न शव बाथरूम में पडा देखा। शव देख बच्चों ने शोर मचाया तो शिक्षक व गांव के लोग मौके पर पहुंचे। सूचना मिलते ही परिजन भी पहुंच गए। परिजनों ने कपडों से शव की पहचान की। भाई ने थाने में दी तहरीर में आरोप लगाया है कि रेप के बाद हत्या की गई है। पहचान छिपाने के लिए शव पर तेजाब डाला गया है। मामला पोक्सो सहित अन्य धाराओं में दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष प्रदीप यादव का कहना है पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।

सौजन्य: नव भारत टाइम्स-

| Updated: Nov 22, 2016, 08:27PM IST

http://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/others/dalit-girlamp39s-body-was-found-in-the-bathroom-of-the-school/articleshow/55565456.cms

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भाइयों ने किया प्रेग्नेंट बहन का ऐसा हाल, पति, सास और ससुर को किया खत्म

Bhaskar News | Nov 23, 2016, 07:29 AM IST

खरखौदा.चार दिन पहले हरियाणा के सोनीपत में हुआ ट्रिपल मर्डरकेस आखिरकार ऑनर किलिंग ही निकला है। जिसे एक भाई ने अपनी बहन के लोवर कास्ट में शादी करने से नाराजगी के चलते अंजाम दिया। आरोपी ने रात में 9 महीने की प्रेग्नेंट बहन के घर में घुसकर उसके पति, सास-ससुर, देवर पर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इसमें 3 लोगों की मौत हो गई और गंभीर रूप से जख्मी महिला और उसके पेट में पल रहे बच्चे की जान बहुत मुश्किल से बचाई जा सकी।

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 बहन के पति को जिंदा नहीं देखना चाहते थे आरोपी…

– बता दें कि नीची जाति के प्रदीप ने ऊंची जाति की सुशीला से 4 साल पहले शादी की थी।
– वे दोनों करीब दो साल तक इधर-उधर छिपते रहे। इस दौरान उन्हें धमकियां मिलती रहीं।
– आखिरकार प्रदीप और सुशीला खरखौदा में अपने घरवालों के साथ रहने लगे तो मोनू उनके यहां आने-जाने लगा। प्रदीप ने समझा कि अब सब नॉर्मल हो गया।

– जबकि, सुशीला के भाई बहन के इंटरकास्ट मैरिज किए जाने से इतने नाराज थे कि उसके पति को जिंदा नहीं देखना चाहते थे।

 मोनू और हरीश पर दर्ज है कई मामले

– सुशीला के भाई मोनू और बुआ के लड़के हरीश पर रेवाड़ी, झज्जर, दादरी और गुड़गांव में कई क्रिमिनल केस दर्ज हैं। वे करीब एक साल से इस वारादात को अंजाम देने की फिराक में थे।

– बदला लेने के लिए सोनू-मोनू ने हरीश के जेल से आने का इंतजार किया। शक है कि हरीश की गैंग भी इस वारदात में शामिल है।

– जमीन विवाद में 2008 में हरीश अपनी बुआ के बेटे की हत्या कर चुका है। उसने अपनी बुआ पर भी जानलेवा हमला किया था, लेकिन वह बच गईं। इस मामले में उसे उम्रकैद हो चुकी है।
– वह जुलाई में 42 दिन की पैरोल पर आया था, लेकिन वापस जेल गया ही नहीं।

 पहले जीता भरोसा, फिर दिया वारदात को अंजाम

– गिरफ्तार सोनू ने बताया कि छोटे भाई मोनू ने बहन सुशीला के घर आना-जाना शुरू किया था, फिर पति प्रदीप और उसके घरवालों का भरोसा जीता।

– पुलिस को अब पूरा शक है कि मोनू ने ही अपने साथियों के साथ शुक्रवार रात अपनी बहन के घर में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की थी। जिसमें देशी हथियारों का इस्तेमाल किया गया।

– इसमें उसके पति प्रदीप, सास सुनीता और ससुर सुरेश को मौत के घाट उतार दिया।

– पति को बचाने दौड़ी 9 महीने की प्रेग्नेंट सुशीला को भी तीन गोलियां लगी और प्रदीप का भाई सूरज भी जख्मी हो गया था।

– अंदाज के मुताबिक, वारदात की रात मोनू ने ही प्रदीप को दरवाजा खोलने के लिए कहा होगा, क्योंकि वह उसकी आवाज पहचानता था।

सौजन्य: दैनिक भास्कर-

Bhaskar News | Nov 23, 2016, 07:29 AM IST

http://www.bhaskar.com/news/HAR-PAN-HMU-police-solve-kharkhauda-triple-murder-news-hindi-5465498-PHO.html

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मैडम, आइटम गर्ल कह कर परेशान करती हैं

मैडम हमें आइटम गर्ल कहकर तंज कसती हैं,और छात्रावास में नहीं आती,खाने को नहीं देतीं और जब उनसे छात्रावास में रुकने को कहते है तो अपशब्द बोलते हुए कहती है कि मैं अपने पति के साथ रहूंगी तुम्हारे पास सोऊं जब यह शिकायत छात्राएं पत्रकारों से कर रहीं थीं कि तभी वहां छात्रावास की अधीक्षिक आ गईं और शिकायत कर रही छात्राओं को मनाने के अंदाज में बोलीं -यहां से हास्टल चलो अपन वहीं चलकर बात करेंगे, लेकिन छात्राएं नहीं मानी और कलेक्टर से शिकायत करने की बात पर अड़ी रही। तीन घंटे इंतजार के बाद जब कलेक्टर से मुलाकात नहीं हुई तो उनके अधीनस्थ अधिकारियों से शिकायत कर वापस चली गईं।

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मंगलवार को शासकीय अनुसूचित जाति नवीन कन्या छात्रावास की दो दर्जन छात्राओं ने कलेक्टोरेट पहुंचकर हॉस्टल अधीक्षिक पर आरोप लगाए कि वह छात्राओं के साथ गलत व्यवहार करती हैं और हॉस्टल में कई दिनों तक नहीं आती जब हॉस्टल में ही रुकने को कहते है तो कहती है कि मेरे भी बच्चे हैं और मैं पति के साथ यहां सोऊंगी तो तुम्हें कैसा लगेगा। इस तरह कि अश्लील बात मैडम करती हैं। छात्राओं का आरोप था कि मैडम खाने की बेहतर सामग्री भी बाजार से नहीं मंगाती हॉस्टल से बैग में सब्जी लेकर आई छात्राओं ने मैडम के सामने ही कहा कि इतनी सड़ी-गली सब्जी और प्याज, खिलाते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती। तभी छात्रावास की अधीक्षिक प्रीति सूर्यवंशी ने कहा कि आप सब गलत आरोप मत लगाओ और यहां से हॉस्टल चलो वहीं पर चलकर बात करेंगे । तो छात्राओं ने वहां जाने से मना कर दिया और अपनी बात कलेक्टर से कह कर जाने की बात उन्होंने कही। लेकिन जब छात्राओं की मुलाकात कलेक्टर से नहीं हो सकी तो आवेदन सीईओ डीके मौर्य को सौंपकर वहां से चली गईं। खास बात यह है कि पहले पुराने आश्रम के छात्राएं इन्हीं मैडम की शिकायत लेकर कलेक्टोरेट आई थीं जिस पर कलेक्टर के निर्देश पर डीओ ट्राइबल ने उन्हें वहां से हटाकर दूसरे छात्रावास का प्रभार सौंपा था अब वहां भी छात्राओं ने शिकायतें शुरु कर दी हैं।

छात्राओं द्वारा लगाए जा रहे आरोप बिलकुल निराधार हैं

छात्राओं द्वारा जितने भी आरोप लगाए जा रहे हैं वह बिलकुल गलत हैं। इनके पीछे वह लोग हैं जो मुझे काम नहीं करने देना चाहते हैं। मैं शासन के नियम-कायदे से छात्रावास संचालन कर रहीं हूं। इसीलिए खफा हैं। प्रीति सूर्यवंशी, छात्रावास अधीक्षक

सौजन्य: दैनिक भास्कर-

Bhaskar News Network | Nov 23, 2016, 05:30 AM IST
http://www.bhaskar.com/news/MP-OTH-MAT-latest-shivpuri-news-053005-1434309-NOR.html

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एसटी एससी कानून में 4 सालों में सिर्फ 22 लोगों को मिली सजा, ज्यादातर छूटे

 

कुछ मामलों में दुरुपयोग होता है, कई प्रकरणों में सबूत नहीं।

भास्कर न्यूज | रायगढ़

अनुसूचित जाति व जनजाति के उत्पीड़न को रोकने के लिए कानून में लगातार संशोधन करते हुए सख्ती बरती जा रही है। इसके बाद भी उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कुछ मामले पूर्वाग्रह से ग्रस्त तो कुछ सबूतों के अभाव में सजा तक नहीं पहुंच पाते। पिछले चार वर्षों में जिले में एसटीएससी के 185 मामले दर्ज हुए हैं उसमें सिर्फ 22 आरोपियों को दोषी करार दिया गया है।

55 मामलों में लोग दोषमुक्त हुए हैं जबकि कुछ मामले विचाराधीन हैं। अनुसूचित जाति व जनजाति के खिलाफ होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए अगस्त 1989 में कड़ा कानून लागू किया गया है। कानून के तहत संबंधित समुदाय के विरुद्ध किए जाने वाला अपराध गैरजमानती है। दोष साबित होने पर तीन साल से लेकर आजीवन कारावास की भी सजा है। इस मामले में लगातार सख्ती बरती जा रही है। बावजूद उसके उत्पीड़न कम होने के बजाय लगातार बढ़ रहे है। मामलों की संख्या साल दर साल बढ़ती ही जा रही है। इस वर्ष10 महीनों के भीतर अब तक 51 मामले सामने आ चुके है, जिसमें से 3 मामलों में बाकायदा आरोपी दोषमुक्त भी हो चुका है। शेष प्रकरण पुलिस की जांच में है।

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वर्ष प्रकरण दोषी दोषमुक्त

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वर्ष प्रकरण दोषी दोषमुक्त

सबूतों का अभाव भी मजबूरी

एसटीएससी एक्ट में सबसे अहम रोल गवाहों का होता है। इसमें गवाहों के रूप में सामान्य या पिछड़ा वर्ग से होना बेहद जरूरी है। संबंधित समुदाय के गवाह नहीं होने पर पूरा मामला ही ठंडे बस्ते में चला जाता है। अधिकांश मामले में गवाह या तो दबाव में पलट जाते हैं, या फिर गवाही देने से मना कर देते हैं। इस कारण से मामला कोर्ट पहुंचने से पहले ही टांय-टांय फिस्स हो जाता है।

जरा ये भी जानें

सार्वजनिक स्थानों पर हो गुनाह तो होगा अपराध दर्ज।

एसटीएससी समुदाय के लाेगों को पहचानने वाले व्यक्ति पर ही होगा जुर्म दर्ज।

एसटीएससी एक्ट गैर जमानती है। त्वरित जांच और त्वरित कार्रवाई का प्रावधान है।

1 लाख से लेकर 9 लाख दिए जाते हैं क्षतिपूर्ति मुआवजा राशि।

गवाहों में दूसरे समुदाय का होना जरूरी।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने एससी-एसटी (उत्पीड़न निरोधक) एक्ट में सुधार कर 14 अप्रैल, 2016 को नए नियम को लागू कर दिया गया है। साल 1989 में बने इस कानून को संसद में इस साल सुधार के लिए पेश किया गया था। नए नियम में ऐसे उत्पीड़न के मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

1989 के एससी-एसटी एक्ट में संशोधन

मुआवजे की नहीं जानकारी

इस एक्ट के तहत पीडितों को शासन की ओर से मुआवजे का प्रावधान है। आपराधिक घटनाओं के तहत पीडितों को एक लाख से लेकर 9 लाख रुपए तक बतौर मुआवजा क्षतिपूर्ति राशि के रूप में दिया जाता है। बलात्कार, हत्या जैसे प्रकरणों में जहां साढ़े 8 लाख रुपए तक मुआवजा है, ताे छेड़खानी, मारपीट जैसे मामले में दो लाख से 3 लाख तक मुआवजे देने का नियम है। प्रचार प्रसार के अभाव व प्रक्रियाओं के प्रपंच के चलते संबंधित वर्ग के अधिकांश लोगों को मुआवजे की जानकारी ही नहीं है। इस वजह से लोगों को सरकार की इस योजना का फायदा नहीं मिल पाता।

उत्पीड़न को लेकर नहीं गंभीर

ग्रामीण क्षेत्रों में अभी संबंधित समुदाय के लोगों को अत्याचारों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी संख्या काफी अधिक है। बावजूद उसके ऐसे मामलों की रोकथाम को लेकर न तो कोई अभियान चलाया जाता है, और न ही लोगों को जागरूक किया जाता है। शिकायत आने पर ही मामला उजागर होता है।

4 सालों के आंकड़े

चार सालों में 185 मामले सामने आए है। लगातार कठोर कार्रवाई की जा रही है। अपराध में कमी आई है।” वीरेंद्र शर्मा, डीएसपी आजाक

एसटीएससी से जुड़े अपराधों में एक लाख से लेकर 9 लाख तक मुआवजे का प्रावधान है। प्रक्रियाओं के तहत मुआवजा दिया जाता है। ” संकल्प साहू, सहायक आयुक्त आदिम जाति

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वर्ष प्रकरण दोषी दोषमुक्त

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वर्ष प्रकरण दोषी दोषमुक्त

दलित महिलाएं भी नहीं सुरक्षित

वर्ष 2005 से लेकर अब तक महिलाओं से जुड़े 235 अपराध सामने आए हैं, जिसमें बलात्कार की संख्या जहां 123 है तो वहीं 91 मामलों में महिलाएं छेड़छाड़ का शिकार हुई है। इसमें से 77 मामले में नाबालिग किशोरियां रही तो वहीं 138 बालिग महिलाएं दुष्कर्म से पीड़ित हुई। हालांकि प्रेम प्रसंग के सिर्फ 24 मामले थे, जबकि 159 महिलाओं को अगवा या फिर बलात्कार किया गया।

सौजन्य: दैनिक भास्कर-

Bhaskar News Network | Nov 22, 2016, 03:00 AM IST

http://www.bhaskar.com/news/CHH-RGH-MAT-latest-raigarh-news-030004-1427022-NOR.html

 

 

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