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पर्दे के पीछे भी है दलितों का दमदार रोल

कबाली फिल्म के प्रोडक्शन क्रू के ज्यादातर मेंबर दलित हैं। डायरेक्टर पा.रंजीत, सिनेमैटोग्रफर जी.मुरली से लेकर आर्ट एंड कस्ट्यूम डायरेक्टर था.रामालिंगम तक सभी दलित समाज से हैं.

रजनीकांत
 

लंबे इंतजार के बाद फाइनली सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म कबाली रिलीज हो गई है। फिल्म के पहले रजनीकांत किताब पढ़ रहे हैं। फिर जेल की सलाखों से पैन होता हुआ कैमरा कबाली पर जाकर टिकता है। वही किरदार जो रजनीकांत फिल्म में निभा रहे हैं। वह पढ़ता है ‘my father baliah’, ये किताब एक दलित विचारक वाई.बी.सत्यनारायण ने लिखी है। इसमें आजादी से पहले और बाद में दलितों पर हुए अत्याचार और उनके हालातों के बारे में बताया गया है। डायरेक्टर रंजीत के फैन्स जानते हैं कि ये उनका फेवरेट शॉट है। जबकि रजनी फैन्स के लिए सुपरस्टार का ऐसे इंट्रो थोड़ा फीका रहा। लेकिन रंजीत के काम करने का स्टाइल थोड़ा हटकर है।

2014 में आई फिल्म मद्रास से डायरेक्टर रंजीत ने तमिल सिनेमा में दलितों के रोल को एक पहचान दिलाने की कवायद शुरू की है। कबाली फिल्म के प्रोडक्शन क्रू के ज्यादातर मेंबर दलित हैं। डायरेक्टर पा.रंजीत, सिनेमैटोग्रफर जी.मुरली से लेकर आर्ट एंड कस्ट्यूम डायरेक्टर था.रामालिंगम और लिरिसिस्ट उमा देवी, अरुण राजा कामराज, एम.बालामुरुगन तक सभी दलित हैं। वहीं फिल्म से जुड़े कुछ लोगों ने अपनी जाति के बारे में जिक्र करने से इंकार किया। उन्होंने कहा कि सिनेमा एक आर्ट है, और आर्ट किसी की जाति या धर्म को नहीं टैलेंट को पहचानता है। उत्तर चेन्नई में रह रहे दलितों के असल हालात दिखाने वाली फिल्म मद्रास को तारीफ मिलने के बाद फिल्म के डायरेक्टर ने कहा था कि वो जाति पर बात करना पसंद नहीं करते। लेकिन जातिवाद को खत्म करने के लिए जरूर कोशिश करना चाहते हैं।

संगीतकार इलैया राजा का उदाहरण देते हुए एक राजनीतिक विचारक ने कहा कि दलितों के पास वो टैलेंट और क्षमता है, जिन्होंने कई प्रोजेक्ट्स को सफल बनाया है। इनमें से कई आर्थिक तंगी और इंडस्ट्री में गॉड फादर ना होने की वजह से अनदेखे रह गए। इंडस्ट्री हमेशा क्षत्रीय और मारवाड़ी बिजनेसमैन के पैसों पर चली। कम ही हुआ जब कोई दलित बिजनेसमैन सामने आया हो। लेकिन मद्रास जैसी फिल्में बदलाव लेकर आ रही हैं।

डायरेक्टर रंजीत ने कास्ट को बेहतरीन तरीके से पेश किया है। ऐसा शायद पहली बार ही हो रहा है जब तमिल मेनसट्रीम सिनेमा में कैरेक्टर को दलित लिट्रेचर पढ़ते दिखाया हो। कबाली फिल्म में रजनीकांत अत्याचार सह रहे तमिल लोगों की आवाज उठाते हैं। इस पर फिल्म के सिनेमैटोग्रैफर कहते हैं कि मलेशियन तमिल हमारे इतिहास का हिस्सा हैं।ये फिल्म उन्हीं पर कुछ रौशनी डाल रही है।

सौजन्य: जनसत्ता-

http://www.jansatta.com/entertainment/behind-the-screen-dalits-have-a-major-role-in-kabali/122745/

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