22000 दलित सीवर की सफाई करते हुए मर गए

22000 दलित सीवर की सफाई करते हुए मर गए

 नई दिल्ली। भाजपा के राज्यसभा सदस्य तरुण विजय ने दलित सफाईकर्मियों की पीड़ा की बात राज्य सभा में उठाई। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान में सफाई का काम किसी और को नहीं बल्कि दलित लोगों को दिया जाता है। वे सफाई के लिए सीवर के मैनहोल में जाते हैं, कई बार जान भी चली जाती है लेकिन पर्याप्त मुआवजा तक नहीं मिलता, न सुरक्षा के इंतजाम हो रहे, न संतोषजनक वेतन मिल रहा।

सांसद ने बुधवार को राज्यसभा में दलित सफाईकर्मियों की समस्याएं जोर-शोर से उठाईं। एक रिपोर्ट के हवाले से बताया कि एक साल में 22,327 दलित महिलाएं और पुरुष सीवर की सफाई करते हुये काल के गाल में समा गए।

उनके परिजनों को मुआवजा भी पूरा नहीं मिला। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि ऐसी मौत पर दस लाख रुपये मुआवजा दिया जाए पर केवल 60-60 हजार मुआवजा दिया गया। कोर्ट ने अपने 2014 के फैसले में कहा था कि सुरक्षा प्रबंधों के बिना सीवर मैनहोल में कर्मचारी को उतारना अपराध घोषित होना चाहिए।

यह भी आदेश था कि 1993 से अब तक मैनहोल और सेप्टिक टैंक की सफाई करते मरने वाले लोगों के आंकड़े एकत्र किए जाएं। सांसद ने कहा कि ऐसा नहीं हुआ। सफाईकर्मियों का न्यूनतम वेतन बीस हजार रुपये होना चाहिए। यह भी सुनिश्चित हो कि सफाई का काम केवल दलितों पर ही न लादा जाए।

सौजन्य: भोपाल समाचार

http://www.bhopalsamachar.com/2016/03/22000.html

 

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